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Thursday, October 1, 2015

सद्व्यवहार

एक राजा ने एक दिन स्वप्न देखा कि कोई परोपकारी साधु उससे कह रहा है कि बेटा! कल रात को तुझे एक विषैला सर्प काटेगा और उसके काटने से तेरी मृत्यु हो जायेगी। वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है, पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेने के लिए वह तुम्हें काटेगा।
प्रातःकाल राजा सोकर उठा और स्वप्न की बात पर विचार करने लगा। धर्मात्माओं को अक्सर सच्चे ही स्वप्न हुआ करते हैं। राजा धर्मात्मा था, इसलिए अपने स्वप्न की सत्यता पर उसे विश्वास था। वह विचार करने लगा कि अब आत्म- रक्षा के लिए क्या उपाय करना चाहिए?सोचते- सोचते राजा इस निर्णय पर पहुँचा कि मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नहीं है। उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय किया।
संध्या होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शय्या तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया, सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया, मीठे दूध के कटोरे जगह- जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुँचाने या छेड़- छाड़ करने का प्रयत्न न करे। रात को ठीक बारह बजे सर्प अपनी बाँबी में से फुसकारता हुआ निकला और राजा के महल की तरफ चल दिया। वह जैसे- जैसे आगे बढ़ता गया, अपने लिए की गई स्वागत व्यवस्था को देख- देखकर आनन्दित होता गया। कोमल बिछौने पर लेटता हुआ मनभावनी सुगन्ध का रसास्वादन करता हुआ, स्थान- स्थान पर मीठा दूध पीता हुआ आगे बढ़ता था। क्रोध के स्थान पर सन्तोष और प्रसन्नता के भाव उसमें बढ़ने लगे। जैसे- जैसे वह आगे चलता गया, वैसे ही वैसे उसका क्रोध कम होता गया। राजमहल में जब वह प्रवेश करने लगा तो देखा कि प्रहरी और द्वारपाल सशस्त्र खड़े हैं, परन्तु उसे जरा भी हानि पहुँचाने की चेष्टा नहीं करते। यह असाधारण सौजन्य देखकर सर्प के मन में स्नेह उमड़ आया। सद्व्यवहार, नम्रता, मधुरता के जादू ने उसे मन्त्र- मुग्ध कर लिया था। कहाँ वह राजा को काटने चला था, परन्तु अब उसके लिए अपना कार्य असंभव हो गया। हानि पहुँचाने के लिए आने वाले शत्रु के साथ जिसका ऐसा मधुर व्यवहार है, उस धर्मात्मा राजा को काटूँ तो किस प्रकार काटूँ? यह प्रश्न उससे हल न हो सका। राजा के पलंग तक जाने तक सर्प का निश्चय पूर्ण रूप से बदल गया।
सर्प के आगमन की राजा प्रतीक्षा कर रहा था। नियत समय से कुछ विलम्ब में वह पहुँचा। सर्प ने राजा से कहा- ‘हे राजन्! मैं तुम्हें काटकर अपने पूर्व जन्म का बदला चुकाने आया था, परन्तु तुम्हारे सौजन्य और सद्व्यवहार ने मुझे परास्त कर दिया। अब मैं तुम्हारा शत्रु नहीं मित्र हूँ। मित्रता के उपहार स्वरूप अपनी बहुमूल्य मणि मैं तुम्हें दे रहा हूँ। लो इसे अपने पास रखो।’ इतना कहकर और मणि राजा के सामने रखकर सर्प उलटे पाँव अपने घर वापस चला गया।भलमनसाहत और सद्व्यवहार ऐसे प्रबल अस्त्र हैं, जिनसे बुरे- से स्वभाव के दुष्ट मनुष्यों को भी परास्त होना पड़ता है...!!!"

Edited and compile by
Smt Kanchan ji
(Senior member ~"Yaatra"watsapp group)

Friday, September 11, 2015

पाप का फल

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में भोजन करा रहा था।तब पंक्ति के अंत में बैठे एक ब्राह्मण कोभोजन परोसते समय एक चील अपने पंजे में एक मुर्दा सांप लेकर राजा के ऊपर से गुजरी और उस मुर्दा सांप के मुख से कुछ बुँदे जहर की खाने में गिर गयी।किसी को कुछ पता नहीं चला।फलस्वरुप वह  ब्राह्मण जहरीला खाना खाते ही मर गया।अब जब राजा को सच का पता चला तो ब्रह्म हत्या होने से उसे बहुत दुःख पहुंचा।यमराज के लिए यह फैसला लेना मुश्किल हो गया की पाप कर्म का फल किसके खाते में जाएगा? राजा जिसको पता ही नहीं था की खाना जहरीला हो गया है या वह चील...जो जहरीला सांप लिए राज के ऊपर से गुजरी...या वह मुर्दा सांप जो पहले से मर चूका था । दोस्तों बहुत दिनों तक यह फैसला यमराज के दरबार में अटका रहा।फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उसके राजमहल में आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया ,पर रास्ता बताने के साथ 2 ब्राह्मणों से यह भी कह दिया भाई जरा ध्यान रखना वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है।"बस मित्रों जैसे ही उस महिला ने यह शब्द कहे उसी समय यमराज ने यह फैसला ले लिया की उस ब्राह्मण की मृतयु का फल इस महिला को जाएगा इस महिला जो पाप का फल भुगतना होगा।यमराज के दूतों ने पूछा प्रभु ऐसा क्यों? जबकि उस ब्राह्मण की हत्या में महिला की कोई भूमिका नहीं थी।तब यमराज ने कहा कि देखो जब कोई व्यक्ति पाप करता है उसे आनन्द मिलता है।उस ब्रहामण की हत्या में न राजा को आनन्द मिला न मरे हुए सांप कोआनंद मिला न ही चील को आनन्द मिला पर उस पाप करम की घटना की बुराई करके उसका बखान करने से उस महिला को जरूर आनंद मिला इसलिए राजा के उस अनजाने पाप कर्म का फल इस महिला के खाते में जाएगा। इस घटना के तहत आजतक जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे के पाप कर्म का बखान बुरे भाव से करता है उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा बुराई करने वाले के खाते में डाल दिया जाता है।कई बार हम सोचते है कि जीवन में हमने कोई पाप नहीं किया फिर भी हमारे जीवन में कष्ट क्यों आया। कष्ट और कहीं से नहीं बल्कि लोगो की बुराई करने के कारण उसके पाप कर्मो से आया होता है।जिनको बुराई करते ही यमराज हमारे खाते में स्थानांतरित  देते हैं।

Edited and Compiled by
Smt. Kanchan ji
(Senior member~"Yaatra" watsapp group

Thursday, August 14, 2014

The King and his 3 ministers

One day a king called his three ministers to his court and ordered each of them to carry a bag to the garden and collect fresh fruits. Three  of them went to the garden separately. The first minister tried to collect the best of the best   fruits of the king's choice. After a lot of efforts, he filled his bag  .The second minister thought that the king would not taste all the fruits at one time, therefore he collected very quickly. Some were and  some were unripen and rest were  rootten .The third minister thought the king would only see that the bag was full and he was not going to check what did it contain so to save his time he filled it with grass and leaves. The second day the king called his three minister's with their bags to his court and he did'not open bags to see what is there in them. And ordered to imprison. three of them for three months.Now, they didn't have any thing else to eat other than those bags.The minister who had collected fresh fruits   enjoyed eating them and three months passed away.The second minister who had collected the mixer of fresh, unripen, and rotten fruits., enjoyed fresh fruits for a few days and then he had eaten rotten fruits because of it he fell sick and had to face a great trouble. And third minister who had grass & leaves in his bag he died of hunger after a few days.Now, the question to be asked is what are you collecting ? This life is like a garden where you can perform good deeds or the bad one's , but remember whatever you save will help you in the time to come because god is watching you........