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Wednesday, September 30, 2015

गृहस्थी का मूल मंत्र

संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा ही रहा। कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यहां गृह क्लेश क्यों होता है और वह कैसे दूर हो सकता है?’कबीर थोड़ी देर चुप रहे, फिर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, ‘लालटेन जलाकर लाओ’। कबीर की पत्नी लालटेन जलाकर ले आई। वह आदमी भौंचक देखता रहा। सोचने लगा इतनी दोपहर में कबीर ने लालटेन क्यों मंगाई। थोड़ी देर बाद कबीर बोले, ‘कुछ मीठा दे जाना।’ इस बार उनकी पत्नी मीठे के बजाय नमकीन देकर चली गई।
उस आदमी ने सोचा कि यह तो शायद पागलों का घर है। मीठा के बदले नमकीन, दिन में लालटेन। वह बोला, ‘कबीर जी मैं चलता हूं।’
कबीर ने पूछा, ‘आपको अपनी समस्या का समाधान मिला या अभी कुछ संशय बाकी है?’
वह व्यक्ति बोला, ‘मेरी समझ में कुछ नहीं आया।’ कबीर ने कहा, ‘जैसे मैंने लालटेन मंगवाई तो मेरी घरवाली कह सकती थी कि तुम क्या सठिया गए हो। इतनी दोपहर में लालटेन की क्या जरूरत। लेकिन नहीं, उसने सोचा कि जरूर किसी काम के लिए लालटेन मंगवाई होगी। मीठा मंगवाया तो नमकीन देकर चली गई। हो सकता है घर में कोई मीठी वस्तु न हो। यह सोचकर मैं चुप रहा। इसमें तकरार क्या?
आपसी विश्वास बढ़ाने और तकरार में न फंसने से विषम परिस्थिति अपने आप दूर हो गई।’
उस आदमी को हैरानी हुई। वह समझ गया कि कबीर ने यह सब उसे बताने के लिए किया था। कबीर ने फिर कहा,’ गृहस्थी में आपसी विश्वास से ही तालमेल बनता है। आदमी से गलती हो तो औरत संभाल ले और औरत से कोई त्रुटि हो जाए तो पति उसे नजरअंदाज कर दे। यही गृहस्थी का मूल मंत्र है।’

Compiled and edited by
Mr Gothi ji
(Member ~ "Yaatra" watsapp group)

Saturday, July 4, 2015

गृहस्थी की शक्ति

एक कॉलेज में शादी शुदा ज़िन्दगी के ऊपर एक  चर्चा हो रही थी, जिसमे कुछ शादीशुदा दंपति हिस्सा ले रहे थे।जिस समय प्रोफेसर  मंच पर आते है तो वो नोट करते है कि सभी पति- पत्नी आपस में शादी पर जोक कर रहे होते है और हँस रहे होते है.ये देख कर प्रोफेसर ने कहते है कि चलो पहले  एक खेल खेलते है. उसके बाद हम अपने विषय पर बातें करेंगे। सभी  खुश हो गए और कहा कोनसा खेल?प्रोफ़ेसर ने एक लड़की को खड़ा किया और कहा कि तुम ब्लेक बोर्ड पे तुम्हे जो सबसे अजीज और तुम्हारे सबसे नजदीक हो ऐसे कुछ लोगो के 25- 30 नाम लिखो.लड़की ने पहले तो अपने परिवार के लोगो के नाम लिखे फिर अपने सगे सम्बन्धी, दोस्तों,पडोसी और सहकर्मियों के नाम लिख दिए.अब प्रोफ़ेसर ने उसमे से कोई भी कम पसंद हो वैसे 5 नाम मिटाने को कहा.लड़की ने अपने सहकर्मियों के नाम मिटा दिए. फिर प्रोफ़ेसर ने और 5 नाम मिटाने को कहा. लड़की ने थोडा सोच के अपने पड़ोसियो के नाम मिटा दिए. अब प्रोफ़ेसर ने और 10 नाम मिटाने को कहा. लड़की ने अपने सगे सम्बन्धी और दोस्तों के नाम मिटा दिए.अब बोर्ड पर सिर्फ 4 नाम बचे थे जो उसके मम्मी- पापा, पति और बच्चे का नाम था. अब प्रोफ़ेसर ने कहा इसमें से और 2 नाम मिटा दो.लड़की असमंजस में पड गयी बहुत सोचने के बाद बहुत दुखी होते हुए उसने अपने मम्मी- पापा का नाम मिटा दिया..सभी लोग स्तब्ध और शांत थे क्योकि वो जानते थे कि ये गेम सिर्फ वो लड़की ही नहीं खेल रही थी उनके दिमागों में भी यही सब चल रहा था।अब सिर्फ 2 ही नाम बचे थे-पति और बेटे का.प्रोफ़ेसर ने कहा और एक नाम मिटा दो.लड़की अब सहमी सी रह गयी. बहुत सोचने के बाद रोते हुए अपने बेटे का नाम काट दिया.प्रोफ़ेसर ने अब उस लड़की को कहा तुम अपनी जगह पर जाके बैठ जाओ.और सभी की तरफ गौर से देखा.और पूछा- क्या कोई बता सकता है कि ऐसा क्यों हुआ कि सिर्फ पति का ही नाम बोर्ड पर रह गया।कोई जवाब नहीं दे पाया. सभी मुँह लटका के बैठे थे.प्रोफ़ेसर ने फिर उस लड़की को खड़ा किया और कहा. ऐसा क्यों ! जिसने तुम्हे जन्म दिया और पाल पोस के इतना बड़ा किया उनका नाम तुमने मिटा दिया.और तो और तुमने अपनी कोख से जिस बच्चे जन्म दिया उसका भी नाम तुमने मिटा दिया ?तो लड़की ने सुबकते हुए जवाब दिया कि अब मम्मी- पापा बूढ़े हो चुके है और कुछ साल के बाद वो मुझे और इस दुनिया को छोड़ के चले जायेंगे और मेरा बेटा जब बड़ा हो जायेगा तो जरूरी नहीं कि वो शादी के बाद मेरे साथ ही रहे।पर मेरे पति जब तक मेरी जान में जान है तब तक मेरा आधा शरीर बनके मेरा साथ निभायेंगे इस लिए मेरे लिए सबसे अजीज मेरे पति है.प्रोफ़ेसर और बाकी स्टूडेंट ने तालियों की गूंज से लड़की को सलामी दी.प्रोफ़ेसर ने कहा तुमने बिलकुल सही कहा कि तुम और सभी के बिना रह सकती हो पर अपने आधे अंग अर्थात अपने पति के बिना नहीं रह सकती हो.





Compiled and Edited by Sh . Tejveer ji