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Monday, January 1, 2018

परीक्षा

किसी राजा के पास एक बैल था । एक बार उसने एलान किया की जो कोई इस बैल को   चारागाह में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा।किंतु बैल का पेट पूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्षा मैं खुद करूँगा।
इस एलान को सुनकर एक मनुष्य राजा के पास आकर कहने लगा कि बैल को चराना कोई बड़ी बात नहीं है।
वह बैल को लेकर खेत में गया और सारे दिन उसे घास चराता रहा,, शाम तक उसने बैल को खूब घास खिलाई और फिर सोचा की सारे दिन इसने इतनी घास खाई है अब तो इसका पेट भर गया होगा ! अब इसको राजा के पास ले चलूँ ,बैल के साथ वह राजा के पास गया,राजा ने थोड़ी सी हरी घास बैल के सामने रखी तो बैल उसे खाने लगा। इस पर राजा ने उस मनुष्य से कहा की तूने उसे पेट भर खिलाया ही नहीं वर्ना वह घास क्यों खाने लगता। बहुत लोगो ने बैल का पेट भरने का प्रयत्न किया किंतु ज्यों ही दरबार में उसके सामने घास डाली जाती तो वह फिर से खाने लगता। एक विद्वान् ब्राह्मण ने सोचा इस एलान का कोई तो रहस्य है ! इस कार्य में युक्ति से काम लेने से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है ! वह बैल को चराने के लिए ले गया। जब भी बैल घास खाने के लिए जाता तो वह उसे लठ से मारता. सारे दिन में ऐसा कई बार हुआ . अंत में बैल ने सोचा की यदि मैं घास खाने का प्रयत्न करूँगा तो मार खानी पड़ेगी। अतः बैल भूखा ही रहने लगा ! शाम को वह ब्राह्मण बैल को लेकर राजदरबार में लौटा, बैल को तो उसने बिलकुल घास नहीं खिलाई थी फिर भी राजा से कहा मैंने इसको भरपेट खिलाया है। अत: यह अब बिलकुल घास नहीं खायेगा,, अतः कर लीजिये परीक्षा . राजा ने घास डाली लेकिन उस बैल ने उसे खाना तो दूर रहा देखा और सूंघा तक नहीं . बैल के मन में यह बात बैठ गयी थी कि अगर घास खाऊंगा तो मार पड़ेगी . अत: उसने घास नहीं खाई .

शिक्षा :- यह हमारा मन भी एक " बैल " ही है " बैल को घास चराने ले जाने वाला ब्राह्मण " आत्मा" है। राजा "परमात्मा" है।

Wednesday, October 21, 2015

न्याय

एक वैश्या मरी और उसी दिन उसके सामने रहने वाला बूढ़ा सन्यासी भी मर गया,संयोग की बात है।देवता लेने आए सन्यासी को नरक में और वैश्या को स्वर्ग में ले जाने लगे। संन्यासी एक दम  खड़ा हो गया,तुम ये कैसा अन्याय कर रहे हो? मुझे नरक में और वैश्या को स्वर्ग में ले जा रहे हो,जरूर कोई भूल हो गई है. उसे परमात्मा के पास ले जाया गया, परमात्मा ने कहा इसके पीछे एक गहन कारण है,-वैश्या शराब पीती थी,भोग में रहती थी,पर जब तुम मंदिर में बैठकर भजन गाते थे,धूप दीप जलाते थे,घंटियां बजाते थे,,,तब वह सोचती थी कब मेरे जीवन में यह सौभाग्य होगा,मैं मंदिर में बैठकर भजन कर पाऊंगी कि नहीं,वह तिल। तिल रोती थी,और तुम्हारे धूप दीप की सुगंध जब उसके घर मे पहुंचती थी तो वह अपना अहोभाग्य समझती थी,घंटियों की आवाज सुनकर मस्त हो जाती थी।लेकिन तुम्हारा मन पूजापाठ करते हुए भी यही सोचता कि वैश्या है तो सुंदर पर वहां तक कैसे पंहुचा जाए?तुम हिम्मत नही जुटा पाए,,तुम्हारी प्रतिष्ठा आड़े आई--गांव भर के लोग तुम्हें संयासी मानते थे।
जब वैश्या नाचती थी,शराब बंटती थी,तुम्हारे मन में वासना जगती थी इसलिए वैश्या को स्वर्ग लाया गया और तुम्हें नरक में।वेश्या को विवेक पुकारता था। ,वह प्रार्थना करती थी तुम इच्छा रखते थे वासना की।वह कीचड़ में थी पर कमल की भांति ऊपर उठती गई। और तुम कमल बनकर आए थे कीचड़ में धंसे रहे।

Source ~internet

Friday, September 11, 2015

पाप का फल

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में भोजन करा रहा था।तब पंक्ति के अंत में बैठे एक ब्राह्मण कोभोजन परोसते समय एक चील अपने पंजे में एक मुर्दा सांप लेकर राजा के ऊपर से गुजरी और उस मुर्दा सांप के मुख से कुछ बुँदे जहर की खाने में गिर गयी।किसी को कुछ पता नहीं चला।फलस्वरुप वह  ब्राह्मण जहरीला खाना खाते ही मर गया।अब जब राजा को सच का पता चला तो ब्रह्म हत्या होने से उसे बहुत दुःख पहुंचा।यमराज के लिए यह फैसला लेना मुश्किल हो गया की पाप कर्म का फल किसके खाते में जाएगा? राजा जिसको पता ही नहीं था की खाना जहरीला हो गया है या वह चील...जो जहरीला सांप लिए राज के ऊपर से गुजरी...या वह मुर्दा सांप जो पहले से मर चूका था । दोस्तों बहुत दिनों तक यह फैसला यमराज के दरबार में अटका रहा।फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उसके राजमहल में आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया ,पर रास्ता बताने के साथ 2 ब्राह्मणों से यह भी कह दिया भाई जरा ध्यान रखना वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है।"बस मित्रों जैसे ही उस महिला ने यह शब्द कहे उसी समय यमराज ने यह फैसला ले लिया की उस ब्राह्मण की मृतयु का फल इस महिला को जाएगा इस महिला जो पाप का फल भुगतना होगा।यमराज के दूतों ने पूछा प्रभु ऐसा क्यों? जबकि उस ब्राह्मण की हत्या में महिला की कोई भूमिका नहीं थी।तब यमराज ने कहा कि देखो जब कोई व्यक्ति पाप करता है उसे आनन्द मिलता है।उस ब्रहामण की हत्या में न राजा को आनन्द मिला न मरे हुए सांप कोआनंद मिला न ही चील को आनन्द मिला पर उस पाप करम की घटना की बुराई करके उसका बखान करने से उस महिला को जरूर आनंद मिला इसलिए राजा के उस अनजाने पाप कर्म का फल इस महिला के खाते में जाएगा। इस घटना के तहत आजतक जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे के पाप कर्म का बखान बुरे भाव से करता है उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा बुराई करने वाले के खाते में डाल दिया जाता है।कई बार हम सोचते है कि जीवन में हमने कोई पाप नहीं किया फिर भी हमारे जीवन में कष्ट क्यों आया। कष्ट और कहीं से नहीं बल्कि लोगो की बुराई करने के कारण उसके पाप कर्मो से आया होता है।जिनको बुराई करते ही यमराज हमारे खाते में स्थानांतरित  देते हैं।

Edited and Compiled by
Smt. Kanchan ji
(Senior member~"Yaatra" watsapp group