लेकिन यह सुन वह हीरा और भी ज़ोर से रोने लगा था और बोला था : ‘वह मेरे मूल्य को तो नहीं जानता था, लेकिन मुझे जानता था। वह ज्ञानी तो नहीं था। लेकिन प्रेमी था। और प्रेम जो जानता है, वह ज्ञान नहीं जान पाता है।’
Sunday, July 28, 2019
हीरे की कीमत
लेकिन यह सुन वह हीरा और भी ज़ोर से रोने लगा था और बोला था : ‘वह मेरे मूल्य को तो नहीं जानता था, लेकिन मुझे जानता था। वह ज्ञानी तो नहीं था। लेकिन प्रेमी था। और प्रेम जो जानता है, वह ज्ञान नहीं जान पाता है।’
Wednesday, January 20, 2016
हीरा
एक राजमहल में कामवाली और उसका बेटा काम करते थे. एक दिन राजमहल में कामवाली के बेटे को हीरा मिलता है. वो माँ को बताता है। कामवाली होशियारी से वो हीरा बाहर फेक कर कहती है ये कांच है हीरा नहीं. कामवाली घर जाते वक्त चुपके से वो हीरा उठाके ले जाती है। वह सुनार के पास जाती है । सुनार समझ जाता है इसको कही मिला होगा, ये असली या नकली पता नही इसलिए पुछने आ गई. सुनार भी होशियारीसें वो हीरा बाहर फेंक कर कहता है ये कांच है हीरा नहीं. कामवाली लौट जाती है। सुनार वो हीरा चुपके सेे उठाकर जौहरी के पास ले जाता है, जौहरी हीरा पहचान लेता है। हीरा देखकर उसकी नियत बदल जाती है. वो भी हीरा बाहर फेंक कर कहता है ये कांच है हीरा नहीं. जैसे ही जौहरी हीरा बाहर फेंकता है। उसके टुकडे टुकडे हो जाते है. यह सब एक राहगीर निहार रहा था।वह हीरे के पास जाकर पूछता है। कामवाली और सुनार ने दो बार तुम्हे फेंका। तब तो तूम नही टूटे। फिर अब कैसे टूटे? हीरा बोला कामवाली और सुनार ने दो बार मुझे फेंका क्योंकि वो मेरी असलियत से अनजान थे. लेकिन जौहरी तो मेरी असलियत जानता था तब भी उसने मुझे बाहर फेंक दिया यह दुःख मै सहन न कर सका इसलिए मै टूट गया !!
contributed by
Mrs Jyotsna ji