जब वे वापस लौटे, उस वृद्ध फकीर से उन्होंने जाकर कहा कि मैंने पूछा था, भगवान बोले कि अभी तीन जन्म और लग जाएंगे। वह अपनी माला फेरता था, उसने गुस्से में माला नीचे पटक दी। उसने कहा, तीन जन्म और! यह तो बड़ा अन्याय है। यह तो हद्द हो गई। नारद आगे बढ़ गए। वह फकीर नाचता था उस वृक्ष के नीचे। उससे कहा कि सुनते हैं, आपके बाबत भी पूछा था, लेकिन बड़े दुख की बात है; उन्होंने कहा कि वह जिस दरख्त के नीचे नाचता है, उसमें जितने पत्ते हैं, उतने जन्म उसे लग जाएंगे। वह फकीर बोला, तब तो पा लिया। और वापस नाचने लगा। वह बोला, तब तो पा लिया, क्योंकि जमीन पर कितने पत्ते हैं! इतने ही पत्ते, इतने ही जन्म न? तब तो जीत ही लिया, पा ही लिया। वह वापस नाचने लगा।
Friday, July 26, 2019
मुक्ति
जब वे वापस लौटे, उस वृद्ध फकीर से उन्होंने जाकर कहा कि मैंने पूछा था, भगवान बोले कि अभी तीन जन्म और लग जाएंगे। वह अपनी माला फेरता था, उसने गुस्से में माला नीचे पटक दी। उसने कहा, तीन जन्म और! यह तो बड़ा अन्याय है। यह तो हद्द हो गई। नारद आगे बढ़ गए। वह फकीर नाचता था उस वृक्ष के नीचे। उससे कहा कि सुनते हैं, आपके बाबत भी पूछा था, लेकिन बड़े दुख की बात है; उन्होंने कहा कि वह जिस दरख्त के नीचे नाचता है, उसमें जितने पत्ते हैं, उतने जन्म उसे लग जाएंगे। वह फकीर बोला, तब तो पा लिया। और वापस नाचने लगा। वह बोला, तब तो पा लिया, क्योंकि जमीन पर कितने पत्ते हैं! इतने ही पत्ते, इतने ही जन्म न? तब तो जीत ही लिया, पा ही लिया। वह वापस नाचने लगा।
Thursday, March 17, 2016
भगवान् से फ़रियाद
एक बार एक राजा था, वह जब भी मंदिर जाता, तो 2 फ़क़ीर उसके दाएं और बाएं बैठा करते! दाईं तरफ़ वाला कहता: "हे भगवान, तूने राजा को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे!"
बाईं तरफ़ वाला कहता: "ऐ राजा! भगवान ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे!"
दाईं तरफ़ वाला फ़क़ीर बाईं तरफ़ वाले से कहता: "भगवान से माँग! बेशक वह सबसे बैहतर सुनने वाला है!"
बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: "चुप कर बेवक़ूफ़
एक बार राजा ने अपने वज़ीर को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो फ़क़ीर बैठता है वह हमेशा भगवान से मांगता है तो बेशक भगवान् उसकी ज़रूर सुनेगा, लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है वह हमेशा मुझसे फ़रियाद करता रहता है, तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उसमें अशर्फियाँ डाल दो और वह उसको दे आओ!
वज़ीर ने ऐसा ही किया... अब वह फ़क़ीर मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे फ़क़ीर को चिड़ाता हुआ बोला: "हुह... बड़ा आया 'भगवान् देगा...' वाला, यह देख राजा से माँगा, मिल गया ना?"
खाने के बाद जब इसका पेट भर गया तो इसने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे फ़क़ीर को दे दिया और कहा: "ले पकड़... तू भी खाले, बेवक़ूफ़
अगले दिन जब राजा आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला फ़क़ीर तो आज भी वैसे ही बैठा है लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है!
राजा नें चौंक कर उससे पूछा: "क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला?"
फ़क़ीर: "जी मिला ना बादशाह सलामत, क्या लज़ीज़ खीर थी, मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी!"
राजा: "फिर?"
फ़क़ीर: "फ़िर वह जो दूसरा फ़क़ीर यहाँ बैठता है मैंने उसको देदी, बेवक़ूफ़ हमेशा कहता रहता है: 'भगवान् देगा, भगवान् देगा!'
राजा मुस्कुरा कर बोला: "बेशक, भगवान् ने उसे दे दिया!"
Contributed by
Mrs Neena ji
Sunday, March 13, 2016
फ़कीर का बल
फकीरो के पास फ़क़ीरी के सिवा होता क्या है,,,गुरु नानक साहेब बोले भाई जो धन हमारे पास है उसे आप लूट नही सकते,,,लुटेरे बोले अगर लूट नही सकते तो हम आप का कत्ल कर के आप की लाशो से वो धन पा लेंगे,,,इतना कह कर वो गुरु नानक साहब का कत्ल करने को तत्पर हुए
गुरु नानक बोले ठीक है भाई,,,हमें कत्ल कर दो लेकिन हमारी इच्छा है हमें कत्ल करने के बाद हमारा शरीर अग्नि भेट कर देना,,,
इतने बियाबान जंगल में आग कहाँ से लाएंगे,,,लुटेरो नें सवाल किया तो गुरु नानक साहब ने कुछ दूर जलती एक चिता की तरफ इशारा किया,,,लुटेरो का सरदार अपने कुछ साथियो के साथ उधर गया तो देखता है कि चिता के निकट देवदूत और यमदूतों के बीच बहस हो रही है
यमदूतों ने कहा इस चिता की आत्मा नरकगामी है इसने इस धरा पर असंख्य पाप किये है,,,हमे इसे नर्क ले कर आने का हुक्म हुआ है
देवदूत बोले ये ठीक है की ये आत्मा नरकगामी थी लेकिन इस की चिता की तरफ गुरु नानक साहब ने इशारा किया है इसके पाप उन्होंने माफ़ कर दिए है,,,अब ये अपने धाम को जाएगा
लुटेरो के सरदार ने जब ये सुना तो मन में सोचा कि जिस फकीर की एक ऊँगली के इशारे से दरगाह में गुनाहो से भरे कागज फाड़ दिए जाते है,,,हम ऐसे गुरु नानक का कत्ल करने की सोच रहे है,,,,इतना सोच कर वो अपने सब साथियो के साथ धन्य गुरु नानक साहब के चरणों में नतमस्तक हो गया,