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Wednesday, September 16, 2015

राधा नाम की महिमा

एक व्यक्ति था एक बार एक संत उसके नगर में आये वह उनके दर्शन करने गया और संत से बोला- स्वामी जी! मेरा एक बेटा है, वो न तो भगवान को मानता है, न ही पूजा-पाठ करता है, जब उससे कहो तो कहता है मै किसी संत को नहीं मानता, अब आप ही उसे समझाइये.स्वामी जी ने कहा-ठीक है मैं तुम्हारे घर आऊँगा. एक दिन वे उसके घर गए और उसके बेटे से बोले – बेटा एक बार कहो राधा , बेटा बोला मै क्यों कहूँ, स्वामी जी ने बहुत बार कहा, अंत में वह बोला मै ‘राधा’ क्यों कहूँ, स्वामी जी ने कहा- जब तुम मर जाओ तो मरने पर यमराज से पूँछना कि एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है इतना कहकर वे चले गए. एक दिन वह मर गया यमराज के पास पहुँच गया तब उसने पूँछा आप मुझे बताये की एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है?
यमराज ने कहा – मुझे नहीं पता कि क्या महिमा है, शायद इन्द्र को पता होगा चलो उससे पूछते है जब उसने देखा की यमराज तो कुछ ढीले पड़ रहे है तो बोला- मै ऐसे नहीं जाऊँगा, पालकी मँगाओ तुरंत पालकी आ गयी कहार से बोला- आप हटो यमराज जी आप इसकी जगह लग जाओ, यमराज लग गए, इंद्र के पास गए,
इंद्र ने पूछा – ये कोई खास है क्या?यमराज जी ने कहा- ये पृथ्वीसे आया है और एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है पूँछ रहा है आप बताइये, इंद्र ने कहा -महिमा तो बहुत है पर क्या है ये नहीं पता,ये तो ब्रह्मा जी ही बता सकते है.
व्यक्ति बोला – तुम भी पालकी में लग जाओ,अब उसकी पालकी में एक ओर यमराज दूसरी ओर इंद्र लग गए, ब्रह्मा जी के पास पहुँचे ब्रह्मा जी ने कहा- ये कोई महान व्यक्ति लगता है जिसे ये पालकी में लेकर आ रहे है ब्रह्मा जी ने पूँछा ये कौन है? तो यमराज जी ने कहा- ये पृथ्वी से आया है और एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है पूँछ रहा है.आप को तो पता ही होगा.
ब्रह्मा जी ने कहा – महिमा तो अनंत है पर ठीक-ठीक तो मुझे भी नहीं पता, शंकर जी ही बता सकते है. व्यक्ति ने कहा-तीसरी जगह पालकी में आप लग जाइये ब्रह्मा जी भी लग गए पालकी लेकर शंकरजी के पास गए .शंकर जी ने कहा ये कोई खास लगता है जिसकी पालकी को यमराज,इंद्र, ब्रह्मा जी, लेकर आ रहे है, पूँछा तो ब्रह्मा जी ने कहा ये पृथ्वी से आया है और एक बार राधा नाम लेने की महिमा पूँछ रहा है हमें तो पता नहीं आप को तो जरुर पता होगा आप तो समाधी में सदा उनका ही ध्यान करते है शंकर जी ने कहा- हाँ, पर ठीक प्रकार से तो मुझे भी नहीं पता, विष्णु जी ही बता सकते है.
व्यक्ति ने कहा –आप भी चौथी जगह लग जाइये अब शंकर जी भी पालकी में लग गए अब चारो विष्णु जी के पास गए और पूँछा कि एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है भगवान ने कहा राधा नाम की यही महिमा है कि इसकी पालकी आप जैसे देव उठा रहे है ये अब मेरी गोद में बैठने का अधिकारी हो गया है.

Friday, September 11, 2015

पाप का फल

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में भोजन करा रहा था।तब पंक्ति के अंत में बैठे एक ब्राह्मण कोभोजन परोसते समय एक चील अपने पंजे में एक मुर्दा सांप लेकर राजा के ऊपर से गुजरी और उस मुर्दा सांप के मुख से कुछ बुँदे जहर की खाने में गिर गयी।किसी को कुछ पता नहीं चला।फलस्वरुप वह  ब्राह्मण जहरीला खाना खाते ही मर गया।अब जब राजा को सच का पता चला तो ब्रह्म हत्या होने से उसे बहुत दुःख पहुंचा।यमराज के लिए यह फैसला लेना मुश्किल हो गया की पाप कर्म का फल किसके खाते में जाएगा? राजा जिसको पता ही नहीं था की खाना जहरीला हो गया है या वह चील...जो जहरीला सांप लिए राज के ऊपर से गुजरी...या वह मुर्दा सांप जो पहले से मर चूका था । दोस्तों बहुत दिनों तक यह फैसला यमराज के दरबार में अटका रहा।फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उसके राजमहल में आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया ,पर रास्ता बताने के साथ 2 ब्राह्मणों से यह भी कह दिया भाई जरा ध्यान रखना वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है।"बस मित्रों जैसे ही उस महिला ने यह शब्द कहे उसी समय यमराज ने यह फैसला ले लिया की उस ब्राह्मण की मृतयु का फल इस महिला को जाएगा इस महिला जो पाप का फल भुगतना होगा।यमराज के दूतों ने पूछा प्रभु ऐसा क्यों? जबकि उस ब्राह्मण की हत्या में महिला की कोई भूमिका नहीं थी।तब यमराज ने कहा कि देखो जब कोई व्यक्ति पाप करता है उसे आनन्द मिलता है।उस ब्रहामण की हत्या में न राजा को आनन्द मिला न मरे हुए सांप कोआनंद मिला न ही चील को आनन्द मिला पर उस पाप करम की घटना की बुराई करके उसका बखान करने से उस महिला को जरूर आनंद मिला इसलिए राजा के उस अनजाने पाप कर्म का फल इस महिला के खाते में जाएगा। इस घटना के तहत आजतक जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे के पाप कर्म का बखान बुरे भाव से करता है उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा बुराई करने वाले के खाते में डाल दिया जाता है।कई बार हम सोचते है कि जीवन में हमने कोई पाप नहीं किया फिर भी हमारे जीवन में कष्ट क्यों आया। कष्ट और कहीं से नहीं बल्कि लोगो की बुराई करने के कारण उसके पाप कर्मो से आया होता है।जिनको बुराई करते ही यमराज हमारे खाते में स्थानांतरित  देते हैं।

Edited and Compiled by
Smt. Kanchan ji
(Senior member~"Yaatra" watsapp group