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Tuesday, October 13, 2015

भाग्ये का खेल

एक ग़रीब आदमी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् पूछते हैं क्या चाहिए ?
आदमी कहता है मैं अमीर बनना चाहता हूँ। भगवान् कहते हैं ठीक है लेकिन शर्त ये है कि तू पानी में डूबकर मरेगा। वो आदमी स्वीकार कर लेता है और मन ही मन निश्चय करता है कि कभी पानी में सफर नहीं करेगा।
ग़रीब आदमी की लॉटरी लग जाती है, तो सोचता है कि तट पर ही धूप सेकूगा, सागर में नहीं नहाउंगा। उसी समय कोई उसे लॉटरी में जहाज से सैर करने का एक फ्री टिकट दे देता है, मन में लालच आ जाता है। सोचता है– मैं अकेला थोड़ी ही हूँ, वहाँ तो बहुत लोग होंगे, मुझे मारने के लिए भगवान् सबको तो मारेगें नहीं। जहाज पर सवार हो जाता है।
तट से दूर पहुँचने पर जहाज डूबने लगता है। ग़रीब आदमी भगवान् को पुकारता है, पूछता है, मेरे कारण आप ढाई हजार लोगों को क्यों मार रहे हो?
भगवान् – ये तो मैं ही जानता हूँ कि कैसे-कैसे ये 2500 लोग मेंने एक जगह इकट्ठे किये। 

Friday, September 18, 2015

मायापति

माया का अर्थात है जो आपको ठग ले आपको मोह ले अपने बंधन में बाँध ले वो माया है | जैसे असुरों को समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश वापस लेने के लिए प्रभु ने मोहिनी रूप धर कर उनको ठगा |  ऐसे ही संसार में हम उस माया के अधीन रहते हैं कभी लोभ के रूप में आती है कभी मोह के रूप में आती है कभी अहम् के रूप में आती है | उसके इतने रूप हैं एक रूप से हम छूटते हैं तुरंत दूसरा रूप धर कर आ जाती है और अपने जाल में बाँध लेती है | इससे बचने का उपाय तो सिर्फ एक ही है और वो है जिसकी ये माया है उसकी शरण में चले जाओ बस तभी बच सकते हैं नहीं तो नहीं | इसको एक उदहारण से समझ सकते हैं :

एक मछेरा नदी में जाल डाल रहा था मछलियों को पकड़ने के लिए मछलियाँ घबरा रहीं थी इधर उधर भाग रही थी पर उस जाल से नहीं बच पा रही थी एक योगी उधर से निकले उन्होंने मछलियों की दशा देखी तो मछलियों से बोले अगर तुमने बचना है तो मछेरे के पैरो के पास इकट्ठी हो जाओ फिर तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा | जो मछलियाँ उसके पैरों के पास रहीं वो मछेरे के जाल से बची रहीं |

माया से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है मायापति के चरण कमलों की शरण में जाने से |