Showing posts with label महात्मा. Show all posts
Showing posts with label महात्मा. Show all posts

Saturday, March 12, 2016

चमत्कारिक ताबीज़

किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती थे, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं! कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।

एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।

खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला, “ महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”

महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”

शमशान का नाम सुनते ही राम का चेहरा पीला पड़ गया, “ लल्ल..ल…लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूँगा…”, राम कांपते हुए बोला।

“घबराओ मत यह कोई मामूली ताबीज नहीं है, यह हर संकट से तुम्हे बचाएगा।”, महात्मा जी ने समझाया।

राम ने पूरी रात शमशान में बिताई और सुबह होती ही महात्मा जी के पास जा पहुंचा, “ हे महात्मन! आप महान हैं, सचमुच ये ताबीज दिव्य है, वर्ना मेरे जैसा डरपोक व्यक्ति रात बिताना तो दूर, शमशान के करीब भी नहीं जा सकता था। निश्चय ही अब मैं सफलता प्राप्त कर सकता हूँ।”

इस घटना के बाद राम बिलकुल बदल गया, अब वह जो भी करता उसे विश्वास होता कि ताबीज की शक्ति के कारण वह उसमें सफल होगा, और धीरे-धीरे यही हुआ भी…वह गाँव के सबसे सफल लोगों में गिना जाने लगा।

इस वाकये के करीब १ साल बाद फिर वही महात्मा गाँव में पधारे।

राम तुरंत उनके दर्शन को गया और उनके दिए चमत्कारी ताबीज का गुणगान करने लगा।

तब महात्मा जी बोले,- बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया, और उसे खोला।
उसे खोलते ही राम के होश उड़ गए जब उसने देखा कि ताबीज के अंदर कोई मन्त्र-वंत्र नहीं लिखा हुआ था…वह तो धातु का एक टुकड़ा मात्र था!

राम बोला, “ ये क्या महात्मा जी, ये तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?”

महात्मा जी ने समझाते हुए कहा- ” सही कहा तुमने, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं बल्कि तुम्हारे विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। पुत्र, हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर यहाँ भेजा है। वो है, विश्वास की शक्ति। तुम अपने कार्यक्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था…खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज की वजह से तुम्हारे अन्दर वो विश्वास पैदा हो गया तो तुम सफल होते चले गए ! इसलिए जाओ किसी ताबीज पर यकीन करने की बजाय अपने कर्म पर, अपनी सोच पर और अपने लिए निर्णय पर विश्वास करना सीखो, इस बात को समझो कि जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और निश्चय ही तुम सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाओगे। “

Contributed by
Mrs Rashmi ji

Sunday, December 20, 2015

कृपा


एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया बनाकर रहते थे !एक किरात (जानवरों का शिकार करने वाला) भी जंगल के निकट रहा करता  संत को देखकर हमेशा प्रणाम करता था !ऐसा हमेशा होता था;रोज किरात कुटिया के सामने से निकलता औरसंत को प्रणाम करता !एक दिन किरात संत से बोला -बाबा मै तो मृग का शिकार करने आता हूँ ;आप यहाँ किसका शिकार करने आते हो?संत बोले -मै श्री कृष्ण मृग का शिकार करने आता हूँ ;इतना कहकर संत रोने लगे !किरात बोला -बाबा रोते क्यों हो ;मुझे बताओ ये कृष्ण देखने में कैसा है ?मैंने कभी इस तरह के शिकार के बारे में नहीं सुना ;मै अवश्य ही आपका शिकार आपको लाकर दूँगा !संत ने भगवान का स्वरुप बता दिया -काले रंग का है मोर का मुकुट लगाता है बासुरी बजाता है !किरात बोला -तुम्हारा शिकार हम पकड़कर लाते है जब तक शिकार हम आपको लाकर नहीं देगे तब तक पानी भी नहीं पीयेगे इतना कहकर किरात चला गया ! अब तो एक जगह जाल बिछाकर बैठ गया ; तीन दिन हो गये किरात के मन में वही संत द्वारा बताई छवि बसी हुई थी यूँ ही बैठा रहा !भगवान को दया आ गई और बाल कृष्ण बासुरी बजाते हुए आ गये और स्वयं ही जाल में फस गये !किरात ने तो कभी ऐसा शिकार देखा नहीं था ;संत द्वारा बताई छवि जब आँखों के सामने देखी तो तुरंत चिल्लाने लगा -फंस गया फंस गया मिल गया मिल गया !अच्छा बच्चू तीन दिन भूखा प्यासा रखा अब हाथ में आये हो !तुरंत ठाकुर जी को जाल में ही फसे हुए अपने कंधे पर शिकार की भांति टांगा और संत की कुटिया की ओर चला !कुटिया के बाहर से ही आवाज लगायी -बाबा जल्दी से बाहर आओ आपका शिकार लेकर आया हूँ !संत झट कुटिया से बाहर आये तो क्या देखते है कि किरात के कंधे पर जाल में फंसे ठाकुर जी मुस्कुरा रहे है !संत चरणों में गिर पड़ा फिर ठाकुर जी से बोला -प्रभु हमने बचपन से घर-बार छोड़ा अब तक आप नहीं मिले और इसको तुम ३ दिन मेंही मिल गये ;ऐसा क्यों ? भगवान बोले -बाबा इसने तुम्हारा आश्रय लिया इसलिये इस पर ३ दिन में ही कृपा हो गई !कहने का अभिप्राय यह है कि भगवान पहले उस पर कृपा करते है जो उनके दासों के चरण पकडे होता है !किरात को पता भी नहीं था भगवान कौन है ;कैसे होते है ?पर संत को रोज प्रणाम करताथा !संत प्रणाम और दर्शन का फल यह हुआ कि तीन दिन में ही ठाकुर जी मिल गये !.


Source ~internet

Sunday, September 20, 2015

सौ ऊंट

किसी  शहर  में, एक आदमी किसी सेठ के यहाँ नौकरी  करता था . वो  अपनी  ज़िन्दगी  से  खुश  नहीं  था , हर  समय  वो  किसी  न  किसी  समस्या  से  परेशान  रहता  था .एक बार  शहर  से  कुछ  दूरी  पर  एक  महात्मा  का  काफिला  रुका . शहर  में  चारों  और  उन्ही की चर्चा  थी. बहुत  से  लोग  अपनी  समस्याएं  लेकर  उनके  पास  पहुँचने  लगे ,
उस आदमी  ने  भी  महात्मा  के  दर्शन  करने  का  निश्चय  किया .अगले दिन  सुबह -सुबह ही उनके  काफिले  तक  पहुंचा . बहुत इंतज़ार  के  बाद उसका  का  नंबर  आया .वह  बाबा  से  बोला  ,” बाबा , मैं  अपने  जीवन  से  बहुत  दुखी  हूँ , हर  समय  समस्याएं  मुझे  घेरी  रहती  हैं , कभी नौकरी में समस्या  रहती  है , तो  कभी  घर  पर  अनबन  हो  जाती  है , और  कभी  अपने  सेहत  को  लेकर  परेशान रहता  हूँ …बाबा  कोई  ऐसा  उपाय  बताइये  कि  मेरे  जीवन  से  सभी  समस्याएं  ख़त्म  हो  जाएं  और  मैं  चैन  से  जी सकूँ ?

बाबा  मुस्कुराये  और  बोले , “ पुत्र  , आज  बहुत देर  हो  गयी  है  मैं  तुम्हारे  प्रश्न  का  उत्तर  कल  सुबह दूंगा  लेकिन क्या  तुम  मेरा  एक  छोटा  सा  काम  करोगे ?”

“हमारे  काफिले  में  सौ ऊंट  हैं  ,मैं  चाहता हूँ  कि  आज  रात  तुम  इनका  खयाल  रखो ।
जब  सौ  के  सौ  ऊंट   बैठ  जाएं  तो  तुम   भी  सो  जाना ”,ऐसा कहते  हुए   महात्मा  अपने  तम्बू  में  चले  गए ।अगली  सुबह  महात्मा उस आदमी  से  मिले  और  पुछा , “ कहो  बेटा , नींद  अच्छी  आई .”वो  दुखी  होते  हुए  बोला :“कहाँ  बाबा , मैं  तो  एक  पल  भी  नहीं  सो  पाया. मैंने  बहुत  कोशिश  की  पर  मैं  सभी  ऊंटों  को  नहीं  बैठा  पाया , कोई  न  कोई  ऊंट खड़ा  हो  ही  जाता …!!!

बाबा बोले  , “ बेटा , कल  रात  तुमने  अनुभव  किया कि  चाहे  कितनी  भी  कोशिश  कर  लो  सारे  ऊंट  एक  साथ  नहीं  बैठ  सकते …तुम  एक  को  बैठाओगे  तो  कहीं  और  कोई  दूसरा  खड़ा  हो  जाएगा.इसी  तरह  तुम एक  समस्या  का  समाधान  करोगे  तो  किसी  कारणवश  दूसरी खड़ी हो  जाएगी ।पुत्र  जब  तक  जीवन  है  ये समस्याएं  तो  बनी  ही  रहती  हैं । कभी  कम  तो  कभी  ज्यादा ।”
“तो  हमें  क्या  करना चाहिए  ?” , आदमी  ने  जिज्ञासावश  पुछा ।“इन  समस्याओं  के  बावजूद  जीवन  का  आनंद  लेना  सीखो …
कल  रात  क्या  हुआ ?
1) कई  ऊंट   रात होते -होते  खुद ही  बैठ  गए  ,
2) कई  तुमने  अपने  प्रयास  से  बैठा  दिए ,
3) बहुत  से  ऊंट तुम्हारे  प्रयास  के  बाद  भी  नहीं बैठे  और बाद  में  तुमने  पाया  कि उनमे से कुछ खुद ही  बैठ  गए ।कुछ  समझे ….??
समस्याएं  भी  ऐसी  ही  होती  हैं..
1) कुछ  तो  अपने आप ही ख़त्म  हो  जाती  हैं ,2) कुछ  को  तुम  अपने  प्रयास  से  हल  कर लेते  हो …
3) कुछ  तुम्हारे  बहुत  कोशिश  करने  पर   भी  हल  नहीं  होतीं ,
ऐसी  समस्याओं  को   समय  पर  छोड़  दो । उचित  समय  पर  वे खुद  ही  ख़त्म  हो  जाती  हैं.!! जीवन  है, तो  कुछ समस्याएं रहेंगी  ही  रहेंगी  पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  की  तुम  दिन  रात  उन्ही  के  बारे  में  सोचते  रहो । समस्याओं को  एक  तरफ  रखो 
और  जीवन  का  आनंद  लो।चैन की नींद सो ।जब  उनका  समय  आएगा  वो  खुद  ही  हल  हो  जाएँगी"।

अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम हे..
जिन्दगी का नाम ही
कभी ख़ुशी कभी ग़म हे..!!

Comipled and Edited by
Mrs Bindu ji
(Senior member -"Yaatra" watsapp group)