Showing posts with label ram. Show all posts
Showing posts with label ram. Show all posts

Friday, November 5, 2021

तुलसीदास जी की इच्छा

काशी में एक जगह पर तुलसीदास रोज रामचरित मानस को गाते थे  । उनकी कथा को बहुत सारे भक्त सुनने आते थे। लेकिन एक बार गोस्वामी प्रातःकाल शौच करके आ रहे थे तो कोई एक प्रेत से इनका मिलन हुआ। उस प्रेत ने प्रसन्न होकर गोस्वामीजी को कहा कि मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ। आपने जो शौच के बचे हुए जल से जो सींचन किया है मैं तृप्त हुआ हूँ। मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ  ।

गोस्वामीजी बोले – भैया, हमारे मन तो केवल एक ही चाह है कि प्रभु श्री राम जी का दर्शन हमें हो जाए। राम की कथा तो हमने लिख दी है, गा दी है।पर दर्शन अभी तक साक्षात् नहीं हुआ है। उस प्रेत ने कहा कि महाराज! मैं यदि दर्शन करवा सकता तो मैं अब तक मुक्त न हो जाता? मैं खुद प्रेत योनि में पड़ा हुआ हूँ,  

तुलसीदास जी बोले – फिर भैया हमको कुछ नहीं चाहिए।

तो उस प्रेत ने कहा – सुनिए महाराज! मैं आपको दर्शन तो नहीं करवा सकता लेकिन दर्शन कैसे होंगे उसका रास्ता आपको बता सकता हूँ ।।

तुलसीदास जी बोले कि बताइये ।।

बोले आप जहाँ पर कथा कहते हो, बहुत सारे भक्त सुनने आते हैं, अब आपको तो मालूम नहीं लेकिन मैं जानता हूँ आपकी कथा में रोज हनुमानजी भी सुनने आते हैं। 

तुलसीदास  बोले कहाँ बैठते हैं ?  प्रेत ने  बताया कि सबसे पीछे कम्बल ओढ़कर, एक दीन हीन एक कोढ़ी के स्वरूप में व्यक्ति बैठता है और जहाँ   चप्पल लोग उतारते हैं वहां पर बैठते हैं। उनके पैर पकड़ लेना वो हनुमान जी ही हैं ।।गोस्वामीजी बड़े खुश हुए हैं। आज जब कथा हुई है गोस्वामीजी की नजर उसी व्यक्ति पर है कि वो कब आएंगे? और जैसे ही वो व्यक्ति आकर बैठे पीछे, तो गोस्वामीजी आज अपने आसन से कूद पड़े हैं और दौड़ पड़े। जाकर चरणों में गिर गए हैं ।।वो व्यक्ति बोला कि महाराज आप व्यासपीठ पर हो और मेरे चरण पकड़ रहे हो। मैं एक दीन हीन कोढ़ी व्यक्ति हूँ। मुझे तो न कोई प्रणाम करता है और न कोई स्पर्श करता है। आप व्यासपीठ छोड़कर मुझे प्रणाम कर रहे हो ?

गोस्वामीजी बोले कि महाराज आप सबसे छुप सकते हो मुझसे नहीं छुप सकते हो। अब आपके चरण मैं तब तक नहीं छोडूंगा जब तक आप राम से नहीं मिलवाओगे। जो ऐसा कहा तो हनुमानजी अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गए ।।आज तुलसीदास जी ने कहा कि कृपा करके मुझे राम से मिलवा दो। अब और कोई अभिलाषा नहीं बची। राम जी का साक्षात्कार हो जाए हनुमानजी, आप तो राम जी से मिलवा सकते हो। अगर आप नहीं मिलवाओगे तो कौन मिलवायेगा ? हनुमानजी बोले कि आपको रामजी जरूर मिलेंगे और मैं मिलवाऊँगा लेकिन उसके लिए आपको चित्रकूट चलना पड़ेगा, वहाँ आपको भगवन मिलेंगे ।।

गोस्वामीजी चित्रकूट गए हैं।  सामने से घोड़े पर सवार होकर दो सुकुमार राजकुमार आये। एक गौर वर्ण और एक श्याम वर्ण और गोस्वमीजी इधर से निकल रहे हैं ।।उन्होंने पूछा कि हमको रास्ता बता तो हम भटक रहे हैं ।।गोस्वामीजी ने रास्ता बताया कि बेटा इधर से निकल जाओ और वो निकल गए। अब गोस्वामीजी पागलों की तरह खोजते हुए घूम रहे हैं कब मिलेंगे? कब मिलेंगे ?

हनुमानजी प्रकट हुए और बोले कि मिले?

गोस्वामीजी बोले – कहाँ मिले ?

हनुमानजी ने सिर पकड़ लिया और बोले अरे अभी मिले तो थे। जो घोड़े पर सवार राजकुमार थे वो ही तो थे। आपसे ही तो रास्ता पूछा और कहते हो मिले नहीं। चूक गए और ये गलती हम सब करते हैं। न जाने कितनी बार भगवान हमारे सामने आये होंगे और हम पहचान नहीं पाए। कितनी बार वो सामने खड़े हो जाते हैं हम पहचान नहीं पाते। न जाने वो किस रूप में आ जाये ।।

गोस्वामीजी कहते हैं हनुमानजी आज बहुत बड़ी गलती हो गई। फिर कृपा करवाओ। फिर मिलवाओ ।।

हनुमानजी बोले कि थोड़ा धैर्य रखो। एक बार और फिर मिलेंगे। गोस्वामीजी बैठे हैं। मन्दाकिनी के तट पर स्नान करके बैठे हैं। स्नान करके घाट पर चन्दन घिस रहे हैं। मगन हैं और गा रहे हैं। श्री राम जय राम जय जय राम। ह्रदय में एक ही लग्न है कि भगवान कब आएंगे। श्री राम ,  ठाकुर जी  स्वरूप में आये पर तुसलीदास जी  पहचान न पाए और कहा   " बाबा… चन्दन तो आपने बहुत प्यारा घिसा है। थोड़ा सा चन्दन हमें लगा दो ।।"

गोस्वामीजी को लगा कि कोई बालक होगा। चन्दन घिसते देखा तो आ गया। तो तुरंत लेकर चन्दन ठाकुर जी को दिया और ठाकुर जी लगाने लगे, हनुमानजी महाराज समझ गए कि आज बाबा फिर चूके जा रहे हैं। आज ठाकुर जी फिर से इनके हाथ से निकल रहे हैं ।। हनुमानजी तोता बनकर आ गए शुक रूप में और घोषणा कर दी कि..

चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर ।

तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक देत रघुवीर ।।

हनुमानजी ने घोसणा कर दी कि अब मत चूक जाना।। 

आज जो आपसे चन्दन ग्रहण कर रहे हैं ये साक्षात् रघुनाथ हैं और जो ये वाणी गोस्वामीजी के कान में पड़ी तो गोस्वामीजी चरणों में गिर गए ठाकुर जी तो चन्दन लगा रहे थे। बोले प्रभु अब आपको नहीं छोडूंगा। जैसे ही पहचाना तो प्रभु अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गए हैं  ठाकुर जी अंतर्ध्यान हो गए और वो झलक आखों में बस गई ह्रदय तक उतरकर। फिर कोई अभिलाषा जीवन में नहीं रही है  

Friday, June 11, 2021

राम से बड़ा राम का नाम

 रामदरबार में हनुमानजी महाराज रामजी की सेवा में इतने तन्मय हो गये कि गुरू वशिष्ठ के आने का उनको ध्यान ही नहीं रहा। सबने उठ कर उनका अभिवादन किया पर, हनुमानजी नहिं कर पाये। वशिष्ठ जी ने रामजी से कहा कि राम गुरु का भरे दरबार में अभिवादन नहीं कर अपमान करने पर क्या सजा होनी चाहिए । राम ने कहा गुरुवर आप ही बतायें । वशिष्ठजी ने कहा मृत्यु दण्ड ।राम ने कहा स्वीकार हॆं। तब राम जी ने कहा कि गुरुदेव आप बतायें कि यह अपराध किसने किया हॆं?  बता दूंगा पर राम वो तुम्हारा इतना प्रिय हॆं कि, तुम अपने आप को सजा दे दोगे पर उसको नहीं दे पाओगे  राम ने कहा, गुरुदेव,  राम के लिये सब समान हॆं। मॆने सीता जेसी पत्नी का सहर्ष त्याग धर्म के लिये कर दिया तो, भी आप संशय कर रहे हॆं?

नहीं, राम! मुझे तुम्हारे पर संशय नहीं हॆं पर, मुझे दण्ड के परिपूर्ण होने पर संशय हॆं।

अत:यदि तुम यह विश्वास दिलाते हो कि, तुम स्वयं उसे मृत्यु दण्ड अपने अमोघ बाण से दोगे तो ही में अपराधी का नाम और अपराध बताऊँगा । राम ने पुन: अपना ससंकल्प व्यक्त कर दिया। तब वशिष्ठ जी ने बताया कि, यह अपराध हनुमान जी ने किया हॆं। हनुमानजी ने स्वीकार कर लिया। तब दरबार में रामजी ने घोषणा की कि, कल सांयकाल सरयु के तट पर, हनुमानजी को मैँ स्वयं अपने अमोघ बाण से मृत्यु दण्ड दूंगा।

हनुमानजी के घर जाने पर उदासी की अवस्था में माता अंजनी ने देखा तो चकित रह गयी. कि मेरा लाल महावीर, अतुलित बल का स्वामी, ज्ञान का भण्डार, आज इस अवस्था में?  माता ने बार बार पुछा,  

तब हनुमानजी ने बताया कि, यह प्रकरण हुआ हॆं अनजाने में। माता! आप जानती हें कि,  हनुमान को संपूर्ण ब्रह्माण्ड में कोई नहीं मार सकता,  पर भगवान राम के अमोघ बाण से भी कोई नहीं बच सकता l   

तब माता ने कहा कि, हनुमान, मैंने भगवान शंकर से, "राम" मंत्र (नाम) प्राप्त किया था ,और तुम्हे भी जन्म के साथ ही यह नाम घुटी में पिलाया।  जिसके प्रताप से तुमने बचपन में ही सूर्य को फल समझ मुख में ले लिया, उस राम नाम के होते हुये हनुमान कोई भी तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता । चाहे वो राम स्वयं भी हो l राम नाम की शक्ति के सामने राम की शक्ति और राम के अमोघ शक्तिबाण की शक्तियां महत्वहीन हो जायेगी। जाओ मेरे लाल,  अभी से सरयु के तट पर जाकर राम नाम का उच्चारण करना आरंभ करदो। माता के चरण छूकर हनुमानजी, सरयु किनारे राम राम राम राम रटने लगे।

सांयकाल, राम अपने सम्पूर्ण दरबार सहित सरयुतट आये। सको कोतुहल था कि, क्या राम हनुमान को सजा देगें?

पर जब राम ने बार बार रामबाण ,अपने महान शक्तिधारी ,अमोघशक्ति बाण चलाये पर हनुमानजी के उपर उनका कोई असर नहीं हुआ तो, गुरु वशिष्ठ जी ने शंका बतायी कि, राम तुम अपनी पुर्ण निष्ठा से बाणो का प्रयोग कर रहे हो?  तो राम ने कहा हां गुरूदेव मैँ गुरु के प्रति अपराध की सजा देने को अपने बाण चला रहा हूं, उसमें किसी भी प्रकार की चतुराई करके मैँ कॆसे वही अपराध कर सकता हूं?

 तो तुम्हारे बाण अपना कार्य क्यों नहीं कर रहे हॆ?

तब राम ने कहा, गुरु देव हनुमान राम राम राम की अंखण्ड रट लगाये हुये हॆं।  मेरी शक्तिंयो का अस्तित्व राम नाम के प्रताप के समक्ष महत्वहीन हो रहा है।  इसमें मेरा कोई भी प्रयास सफल नहीं हो रहा है। आप ही बतायें , गुरु देव ! मैँ क्या करुं।

गुरु देव ने कहा,  हे राम ! आज से मैँ तुम्हारा साथ तुम्हारा दरबार, त्याग कर अपने आश्रम जाकर राम नाम जप हेतु जा रहा हूं। जाते -जाते, गुरुदेव वशिष्ठ जी ने घोषणा की कि हे राम ! मैं जानकर ,मानकर. यह घौषणा कर रहा हूं कि स्वयं राम से राम का नाम बडा़ हॆं, महा अमोघशक्ति का सागर है। जो कोई जपेगा, लिखेगा, मनन.करेगा, उसकी लोक कामनापूर्ति होते हुये  भी,वो मोक्ष का भागी होगा।  

तभी से राम से बडा राम का नाम माना जाता है ।

 

Monday, August 27, 2012

Ambaji

 Ambaji is a shaktipeeth located at the border of Rajasthan and Gujrat in the Banaskantha district.. According to legend , the heart of goddess Sati fell at this place. The goddess is worshipped at the new temple located about three km away.In the holy temple(new)  there is no image  of goddess. Only the holy "Shree Bisa Yantra" is worshiped as the main deity.This yantra is gold plated having sacred 51 letters are written in a mystical and spiritual way. This yantra is dressed in a special way to resemble the goddess.There are 9 kinds of decoration is done representing NavDurga, the 9 form of Devi .Even the vehicle of the deity is different each day. . No one can see the Yantra with naked eye. the photography of the Yantra is prohibited.The original temple is located at the Gabbar Hil which can be accessible through newly constructed ropeway or by climbing the stairs(just 900 steps :) ). Here the flame is lit continuously lit and one can witness the footprints of goddess at the front of the temple.This region is called as Arasur. As per another legend , Lord Rama and Laxman visited here to get the blessings of goddess and the goddess Ambaji blessed them a divine arrow called 'Ajay' which later proved important to kill his enemy Ravana. It is also believe that the mundan ceremony of Lord Krishna was performed here.
Important- during Bhadrapad mela and Navraatri days the place is totally packed with devotees. Before visiting, one must consider this factor into account. Make sure that even going via trolley to Gabbar hill, still it will consume at least 3 hrs minimum.

Location
20 Km from  Abu Road. Plenty of cabs are available at Abu Road station.

Not to be missed 
Apart from Gabbar Hill and new Ambaji temple, the following places should not to be miss
1) Kumbharia Jain Temples
2) Kamakshi temple
3) Koteshwar temple

Eating outlet
Apart from many options. US pizza outlet is safe bet for the travellers who are going along with children.






At the main gate of Ambaji

 The ropeway to Gabbar Hill





The Original place where the heart of goddess Sati fell

Tuesday, April 24, 2012

Queen Tara- The Beauty with a brain


In Ramayana, one of the unsung character was Tara who was the daughter of physician Sushena(vanar). She was the wife of Bali .Tara was famous for her divine beauty and  great intelligence. She had an ability to understand the language of all the animals and birds. When she learnt that Lord Rama joined the band of Sugreev , she immediately adviced her husband to make treaty with Sugreev. But Bali ignored her warning and ultimately died in a battle with Lord Rama. After the death of her husband, she demanded promise from Sugreev to make her son Angad as a heir to throne. In another incident, when Lakshman tried to attack Sugreev for forgetting his promise to help Lord Rama, Tara immediately intervened and solved the crisis. This was the proof of her diplomacy.Actually she was a ‘beauty with a brain’

Thursday, November 3, 2011

Akshay Navami

In the Kaartik month,shukla Paksha and Ashtmi tithi is considere best for charity.Many legends are associated with this day. It is believe that on this day
1) Surya Dev(the Sun God) worshiped goddess Durga to acquire its properties because of which he is lighting the whole world.
2) Bharat met Lord Rama after 14 years.
3) It is considered auspicious to eat food under the Amla tree.this ritual is associated with good health.
4) Satya yug also began on this day.
5) The amla fruit is considered as divine fruit of Lord Vishnu.This is the ripening time of this fruit.
6) Amla tree is manifistation of goddess Lakshmi.