Sunday, September 20, 2015

संघर्ष की शक्ति

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया ! .कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! . हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये! एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा, देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है, . एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका
दीजिये, जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो, . फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! .
परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा! . किसान ने गेहूं की फ़सल बोई,
जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी तब पानी ! . तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल
बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी, क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी ! . किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, कि फ़सल कैसे उगाई जाती हैं, . बेकार ही इतने
बरस हम किसानो को परेशान करते रहे।फ़सल काटने का समय भी आया , किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, . लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा , एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था, सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी, . बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा,
प्रभु ये क्या हुआ ? तब परमात्मा बोले,” ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया  । ना तेज धूप में उनको तपने दिया , ना आंधी ओलों से जूझने दिया ,  उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया , इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, . वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है ,उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है. सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी से
पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है, उसे अनमोल बनाती है !” . उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी
खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली बनना है तो
चुनोतियाँ तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, . अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे. अगर जिंदगी में प्रखर बनना है, प्रतिभा शाली बनना है, तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा !

Compiled and edited by
Mr Girish Kumar ji
(Senior member -"Yaatra"whatSapp group)

सौ ऊंट

किसी  शहर  में, एक आदमी किसी सेठ के यहाँ नौकरी  करता था . वो  अपनी  ज़िन्दगी  से  खुश  नहीं  था , हर  समय  वो  किसी  न  किसी  समस्या  से  परेशान  रहता  था .एक बार  शहर  से  कुछ  दूरी  पर  एक  महात्मा  का  काफिला  रुका . शहर  में  चारों  और  उन्ही की चर्चा  थी. बहुत  से  लोग  अपनी  समस्याएं  लेकर  उनके  पास  पहुँचने  लगे ,
उस आदमी  ने  भी  महात्मा  के  दर्शन  करने  का  निश्चय  किया .अगले दिन  सुबह -सुबह ही उनके  काफिले  तक  पहुंचा . बहुत इंतज़ार  के  बाद उसका  का  नंबर  आया .वह  बाबा  से  बोला  ,” बाबा , मैं  अपने  जीवन  से  बहुत  दुखी  हूँ , हर  समय  समस्याएं  मुझे  घेरी  रहती  हैं , कभी नौकरी में समस्या  रहती  है , तो  कभी  घर  पर  अनबन  हो  जाती  है , और  कभी  अपने  सेहत  को  लेकर  परेशान रहता  हूँ …बाबा  कोई  ऐसा  उपाय  बताइये  कि  मेरे  जीवन  से  सभी  समस्याएं  ख़त्म  हो  जाएं  और  मैं  चैन  से  जी सकूँ ?

बाबा  मुस्कुराये  और  बोले , “ पुत्र  , आज  बहुत देर  हो  गयी  है  मैं  तुम्हारे  प्रश्न  का  उत्तर  कल  सुबह दूंगा  लेकिन क्या  तुम  मेरा  एक  छोटा  सा  काम  करोगे ?”

“हमारे  काफिले  में  सौ ऊंट  हैं  ,मैं  चाहता हूँ  कि  आज  रात  तुम  इनका  खयाल  रखो ।
जब  सौ  के  सौ  ऊंट   बैठ  जाएं  तो  तुम   भी  सो  जाना ”,ऐसा कहते  हुए   महात्मा  अपने  तम्बू  में  चले  गए ।अगली  सुबह  महात्मा उस आदमी  से  मिले  और  पुछा , “ कहो  बेटा , नींद  अच्छी  आई .”वो  दुखी  होते  हुए  बोला :“कहाँ  बाबा , मैं  तो  एक  पल  भी  नहीं  सो  पाया. मैंने  बहुत  कोशिश  की  पर  मैं  सभी  ऊंटों  को  नहीं  बैठा  पाया , कोई  न  कोई  ऊंट खड़ा  हो  ही  जाता …!!!

बाबा बोले  , “ बेटा , कल  रात  तुमने  अनुभव  किया कि  चाहे  कितनी  भी  कोशिश  कर  लो  सारे  ऊंट  एक  साथ  नहीं  बैठ  सकते …तुम  एक  को  बैठाओगे  तो  कहीं  और  कोई  दूसरा  खड़ा  हो  जाएगा.इसी  तरह  तुम एक  समस्या  का  समाधान  करोगे  तो  किसी  कारणवश  दूसरी खड़ी हो  जाएगी ।पुत्र  जब  तक  जीवन  है  ये समस्याएं  तो  बनी  ही  रहती  हैं । कभी  कम  तो  कभी  ज्यादा ।”
“तो  हमें  क्या  करना चाहिए  ?” , आदमी  ने  जिज्ञासावश  पुछा ।“इन  समस्याओं  के  बावजूद  जीवन  का  आनंद  लेना  सीखो …
कल  रात  क्या  हुआ ?
1) कई  ऊंट   रात होते -होते  खुद ही  बैठ  गए  ,
2) कई  तुमने  अपने  प्रयास  से  बैठा  दिए ,
3) बहुत  से  ऊंट तुम्हारे  प्रयास  के  बाद  भी  नहीं बैठे  और बाद  में  तुमने  पाया  कि उनमे से कुछ खुद ही  बैठ  गए ।कुछ  समझे ….??
समस्याएं  भी  ऐसी  ही  होती  हैं..
1) कुछ  तो  अपने आप ही ख़त्म  हो  जाती  हैं ,2) कुछ  को  तुम  अपने  प्रयास  से  हल  कर लेते  हो …
3) कुछ  तुम्हारे  बहुत  कोशिश  करने  पर   भी  हल  नहीं  होतीं ,
ऐसी  समस्याओं  को   समय  पर  छोड़  दो । उचित  समय  पर  वे खुद  ही  ख़त्म  हो  जाती  हैं.!! जीवन  है, तो  कुछ समस्याएं रहेंगी  ही  रहेंगी  पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  की  तुम  दिन  रात  उन्ही  के  बारे  में  सोचते  रहो । समस्याओं को  एक  तरफ  रखो 
और  जीवन  का  आनंद  लो।चैन की नींद सो ।जब  उनका  समय  आएगा  वो  खुद  ही  हल  हो  जाएँगी"।

अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम हे..
जिन्दगी का नाम ही
कभी ख़ुशी कभी ग़म हे..!!

Comipled and Edited by
Mrs Bindu ji
(Senior member -"Yaatra" watsapp group)

Saturday, September 19, 2015

Green World

"Let's Change our Vision!"

There was a millionaire who was bothered by severe eye pain. He consulted so many physicians and was getting his treatment done. He did not stop consulting galaxy of medical experts; he consumed heavy loads of drugs and underwent hundreds of injections.
But the ache persisted with great vigour than before. At last a monk who was supposed to be expert in treating such patients was called for by the millionaire. The monk understood his problem and said that for sometime he should concentrate only on green colours and not to fall his eyes on any other colours.
The millionaire got together a group of painters and purchased barrels of green color and directed that every object his eye was likely to fall to be painted in green colour just as the monk had directed.
When the monk came to visit him after few days, the millionaire’s servants ran with buckets of green paints and poured on him since he was in red dress, lest their master not see any other colour and his eye ache would come back.
Hearing this monk laughed said “If only you had purchased a pair of green spectacles, worth just a few rupees, you could have saved these walls and trees and pots and all other articles and also could have saved a large share of his fortune.
You cannot paint the world green.” Let us change our vision and the world will appear accordingly. It is foolish to shape the world, let us shape ourselves first.
Let's change our vision !!!

Compiled and edited by
Mrs. Ojasvita Saxena ji
(Senior memeber-"Yaatra" watsapp group)

Friday, September 18, 2015

Dirty Laundry

A young couple moved into a new neighborhood.The next morning, while they areeating breakfast, the young woman sees her neighbor hang the washed laundry outside.
"That laundry is not very clean", she said, "she doesn't know how to wash correctly. Perhaps she needs better laundry soap."
Her husband looked on, but remained silent. Every time her neighbor would hang her wash to dry, the young woman would make the same comments.

About one month later, the woman was surprised to see a nice clean wash on the line and said to her husband:

"Look! She has learnt how to wash correctly. I wonder who taught her this."

The husband said: "I got up early this morning and cleaned our windows!"

And so it is with life:

"What we see when we are watching others, depends on the purity of the window through which we look.
Before we give any criticism, it might be a good idea to check our state of mind."

Edited and compiled by
Mrs Kajal Ji
(Member~"Yaatra" watsapp group)

मायापति

माया का अर्थात है जो आपको ठग ले आपको मोह ले अपने बंधन में बाँध ले वो माया है | जैसे असुरों को समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश वापस लेने के लिए प्रभु ने मोहिनी रूप धर कर उनको ठगा |  ऐसे ही संसार में हम उस माया के अधीन रहते हैं कभी लोभ के रूप में आती है कभी मोह के रूप में आती है कभी अहम् के रूप में आती है | उसके इतने रूप हैं एक रूप से हम छूटते हैं तुरंत दूसरा रूप धर कर आ जाती है और अपने जाल में बाँध लेती है | इससे बचने का उपाय तो सिर्फ एक ही है और वो है जिसकी ये माया है उसकी शरण में चले जाओ बस तभी बच सकते हैं नहीं तो नहीं | इसको एक उदहारण से समझ सकते हैं :

एक मछेरा नदी में जाल डाल रहा था मछलियों को पकड़ने के लिए मछलियाँ घबरा रहीं थी इधर उधर भाग रही थी पर उस जाल से नहीं बच पा रही थी एक योगी उधर से निकले उन्होंने मछलियों की दशा देखी तो मछलियों से बोले अगर तुमने बचना है तो मछेरे के पैरो के पास इकट्ठी हो जाओ फिर तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा | जो मछलियाँ उसके पैरों के पास रहीं वो मछेरे के जाल से बची रहीं |

माया से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है मायापति के चरण कमलों की शरण में जाने से |

प्रेम और संदेह

एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया।
प्रेम भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में सुलाता।कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते।एक  दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक गए।भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक ही फल लगा था।बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा।बादशाह ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा फकीर को दिया।फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला, 'बहुत स्वादिष्ट ऎसा फल कभी नहीं खाया।एक टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया।फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग लिया।इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए। जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने कहा, 'यह सीमा से बाहर है।आखिर मैं भी तो भूखा हूं।मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं करते।'.और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया।मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था।राजा बोला, 'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?'उस फकीर का उत्तर था,'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?सब टुकड़े इसलिए लेता गया ताकि आपको पता न चले।सच्ची मित्रता में संदेह का कोई स्थान नहीं है



Source~ internet

Wednesday, September 16, 2015

राधा नाम की महिमा

एक व्यक्ति था एक बार एक संत उसके नगर में आये वह उनके दर्शन करने गया और संत से बोला- स्वामी जी! मेरा एक बेटा है, वो न तो भगवान को मानता है, न ही पूजा-पाठ करता है, जब उससे कहो तो कहता है मै किसी संत को नहीं मानता, अब आप ही उसे समझाइये.स्वामी जी ने कहा-ठीक है मैं तुम्हारे घर आऊँगा. एक दिन वे उसके घर गए और उसके बेटे से बोले – बेटा एक बार कहो राधा , बेटा बोला मै क्यों कहूँ, स्वामी जी ने बहुत बार कहा, अंत में वह बोला मै ‘राधा’ क्यों कहूँ, स्वामी जी ने कहा- जब तुम मर जाओ तो मरने पर यमराज से पूँछना कि एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है इतना कहकर वे चले गए. एक दिन वह मर गया यमराज के पास पहुँच गया तब उसने पूँछा आप मुझे बताये की एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है?
यमराज ने कहा – मुझे नहीं पता कि क्या महिमा है, शायद इन्द्र को पता होगा चलो उससे पूछते है जब उसने देखा की यमराज तो कुछ ढीले पड़ रहे है तो बोला- मै ऐसे नहीं जाऊँगा, पालकी मँगाओ तुरंत पालकी आ गयी कहार से बोला- आप हटो यमराज जी आप इसकी जगह लग जाओ, यमराज लग गए, इंद्र के पास गए,
इंद्र ने पूछा – ये कोई खास है क्या?यमराज जी ने कहा- ये पृथ्वीसे आया है और एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है पूँछ रहा है आप बताइये, इंद्र ने कहा -महिमा तो बहुत है पर क्या है ये नहीं पता,ये तो ब्रह्मा जी ही बता सकते है.
व्यक्ति बोला – तुम भी पालकी में लग जाओ,अब उसकी पालकी में एक ओर यमराज दूसरी ओर इंद्र लग गए, ब्रह्मा जी के पास पहुँचे ब्रह्मा जी ने कहा- ये कोई महान व्यक्ति लगता है जिसे ये पालकी में लेकर आ रहे है ब्रह्मा जी ने पूँछा ये कौन है? तो यमराज जी ने कहा- ये पृथ्वी से आया है और एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है पूँछ रहा है.आप को तो पता ही होगा.
ब्रह्मा जी ने कहा – महिमा तो अनंत है पर ठीक-ठीक तो मुझे भी नहीं पता, शंकर जी ही बता सकते है. व्यक्ति ने कहा-तीसरी जगह पालकी में आप लग जाइये ब्रह्मा जी भी लग गए पालकी लेकर शंकरजी के पास गए .शंकर जी ने कहा ये कोई खास लगता है जिसकी पालकी को यमराज,इंद्र, ब्रह्मा जी, लेकर आ रहे है, पूँछा तो ब्रह्मा जी ने कहा ये पृथ्वी से आया है और एक बार राधा नाम लेने की महिमा पूँछ रहा है हमें तो पता नहीं आप को तो जरुर पता होगा आप तो समाधी में सदा उनका ही ध्यान करते है शंकर जी ने कहा- हाँ, पर ठीक प्रकार से तो मुझे भी नहीं पता, विष्णु जी ही बता सकते है.
व्यक्ति ने कहा –आप भी चौथी जगह लग जाइये अब शंकर जी भी पालकी में लग गए अब चारो विष्णु जी के पास गए और पूँछा कि एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है भगवान ने कहा राधा नाम की यही महिमा है कि इसकी पालकी आप जैसे देव उठा रहे है ये अब मेरी गोद में बैठने का अधिकारी हो गया है.